फ़ूड इंस्पेक्टरों की करतूतों की वजह से बिलासपुर खाद्य विभाग लगातार बटौर रहा सुर्खियां...

# Neeraj Makhija | 10 Jan, 2022

बिलासपुर/- इन दिनों बिलासपुर जिले का खाद्य विभाग और उसके प्रमुख अधिकारी अपने फूड इंस्पेक्टरों की करतूतों की वजह से लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं,देखा जाए तो लगातार कहीं से फूड इंसपेक्टरों द्वारा उगाही किए जाने की खबरें आ रही हैं तो कहीं से पद का दुरुपयोग करते हुए उसकी आड़ में व्यवसाय करने की शिकायत सामने आ रही हैं,जिसमे फूड इंस्पेक्टर के खिलाफ थाने में अपराध तक दर्ज किया गया है,ये खाद्य विभाग के शासकीय सेवक हैं तो इस मुगालते में ना रहें कि वे सरकारी दामाद हैं,उन पर उच्च अधिकारियों का संरक्षण है,उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता,इनके कारनामों से खाद्य विभाग की किरकिरी हो रही है,सूत्र बताते है कि शिकायत मिलने पर जहां विभाग प्रमुख द्वारा उन्हें फटकार लगानी चाहिए लेकिन उसकी बजाय वे उन्हें बचने हेतु गुरुमंत्र दे रहे हैं..

 बताते चले आपको मामलें में मिली जानकारी के मुताबिक सीपत और मस्तूरी में पदस्थ फूड इंसपेक्टरों से जुड़ा हुआ हैं,इन पर जनप्रतिनिधियों सहित शासकीय उचित मूल्य की दुकानें संचालित करने वाले दुकानदारों नें हर माह उगाही किए जाने की शिकायत कलेक्टर बिलासपुर से की है,जनपद पंचायत मस्तूरी की जनपद सदस्य विनीता रज्जू भार्गव और जनपद पंचायत मस्तूरी के सभापति नूर मोहम्मद नें अपने लेटर हेड पर बाकायदा मस्तूरी के फूड इंस्पेक्टर आशीष दीवान और प्रीति चौबे द्वारा हर माह 1100 रुपए की मांग जैसे गंभीर आरोप लगाया गया है और दुकान संचालकों की नाराजगी का जिक्र करते हुए उन्हें अन्यंत्र स्थानांतरित किए जाने की मांग की है...

नूर मोहम्मद नें अपने शिकायत पत्र पर दुकानदारों के खाते में आए उन रूपयों का जिक्र किया है जो उन्हें पिछले दो सालों में कोरोना काल में हितग्राहियों को बांटे गए राशन के एवज में सरकार द्वारा कमीशन मिला है उस कमीशन की राशि पर भी फूड इंसपेक्टरों द्वारा दुकानदारों से राशि की मांग की जा रही है..

इतना ही नहीं एक दुकान संचालक ने बताया कि दोनों फूड इंस्पेक्टर द्वारा एक व्यक्ति को भेज कर रुपए की डिमांड की जाती है,यही व्यक्ति बिलासपुर घोषणा पत्र लेने जाने पर हर माह 1100 रुपए सभी दुकानदारों से लेता है इसी व्यक्ति नें कोरोना काल में बाटें गए राशन का कमीशन खाते में आने के बाद 30 हजार रुपए की मांग की थी,वहीं इस गंभीर शिकायत पर खाद्य विभाग खाद्य विभाग के प्रभारी खाद्य नियंत्रक राजेश शर्मा से सवाल पूछा तब उन्होंने कहा कि सहायक खाद्य अधिकारी जांच कर रहे हैं वहीं जब हमनें सहायक खाद्य अधिकारी से जांच के विषय में अपडेट पूछा तो उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा कोई निर्देश नहीं मिला है।

ऐसा लगता है कि प्रभारी खाद्य नियंत्रक अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक ढंड से नहीं कर रहे हैं। उन्हे ना तो विभाग की धूमिल होती क्षवि की चिंता है ना विभाग के मंत्री की। हालाकि एसडीएम मस्तूरी नें इस शिकायती पत्र को संज्ञान में लेकर जांच किए जाने की बात कही है.. बहरहाल जनप्रतिनिधियों और राशन दुकान संचालकों में फूड इंसपेक्टरों पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं किए जाने से आक्रोश साफ झलक रहा है,इस शिकायती पत्र पर प्रभारी जिला खाद्य नियंत्रक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठा रहे हैं यह अपने आप में बड़ा सवाल है...

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