“बिलासपुर में शिक्षा से खिलवाड़,,निजी स्कूल की मनमानी से सैकड़ों छात्रों का भविष्य अधर में”

# Neeraj Makhija | 17 Mar, 2026

बिलासपुर में निजी स्कूलों की मनमानी, शिक्षा विभाग की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सैकड़ों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है।

यह पूरा विवाद शहर के प्रमुख मार्ग पर संचालित ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल से जुड़ा हुआ है, जहां परीक्षा व्यवस्था में अचानक किए गए बदलाव ने शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, वर्षों से संचालित इस स्कूल में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और बड़े संस्थान का भरोसा देकर प्रवेश दिलाया जाता रहा और उनसे लाखों रुपये की फीस ली जाती रही। लेकिन जैसे ही राज्य शासन ने कई वर्षों बाद 5वीं और 8वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा व्यवस्था को दोबारा लागू किया, स्कूल की वास्तविक शैक्षणिक व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठने लगे।

अभिभावकों का आरोप है कि उनके बच्चों से पहले ही स्कूल द्वारा CBSE पैटर्न के तहत परीक्षा दिलवाई जा चुकी है। इसके बावजूद अब अचानक उन्हें छत्तीसगढ़ बोर्ड की परीक्षा देने के लिए बाध्य किया जा रहा है।

परिजनों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई उस बोर्ड के पाठ्यक्रम के अनुसार नहीं हुई है, जिससे दोबारा परीक्षा देना उनके लिए मानसिक दबाव और अन्यायपूर्ण स्थिति पैदा कर रहा है। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब परीक्षा के एक दिन पहले तक परिजन अपनी समस्या को लेकर प्रशासन के सामने गुहार लगाते रहे।

बड़ी संख्या में अभिभावक और विद्यार्थी देर रात तक कलेक्टर बंगले के बाहर खड़े रहे, लेकिन आरोप है कि कोई वरिष्ठ अधिकारी उनकी बात सुनने तक नहीं पहुंचा। हालात बिगड़ते देख मौके पर एडिशनल एसपी, सीएसपी, एसडीएम, शिक्षा विभाग के अधिकारी और कई थानों की पुलिस टीम तैनात करनी पड़ी। भारी पुलिस बल के बीच परिजनों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन बच्चों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे का तत्काल समाधान नहीं निकल सका। शिक्षा विभाग ने मामले को वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष रखने का आश्वासन जरूर दिया, लेकिन परिजनों का कहना है कि जब परीक्षा अगले ही दिन है, तो केवल आश्वासन से समस्या का समाधान संभव नहीं है,ऐसे में विद्यार्थी “परीक्षा दें या छोड़ें” की दुविधा में फंसे हुए हैं। यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है

क्या वर्षों से संचालित इस स्कूल की व्यवस्थाओं का कभी निरीक्षण नहीं हुआ..???

यदि हुआ, तो ऐसी स्थिति कैसे उत्पन्न हो गई? क्या यह केवल स्कूल प्रबंधन की लापरवाही है या शिक्षा विभाग भी उतना ही जिम्मेदार है? कुछ अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते स्कूलों की निगरानी और जांच की जाती, तो विद्यार्थियों को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

वहीं स्कूल प्रबंधन का दावा है कि ऐसी व्यवस्था केवल उनके यहां नहीं, बल्कि शहर के कई अन्य स्कूलों में भी लागू रही है, लेकिन कार्रवाई केवल उनके संस्थान पर की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने न्यायधानी बिलासपुर को उस समय शर्मसार कर दिया, जब विद्यार्थी और उनके माता-पिता आधी रात तक कलेक्टर निवास के बाहर खड़े रहे, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसने किया? स्कूल प्रबंधन, शिक्षा विभाग या फिर दोनों की लापरवाही? फिलहाल पूरे शहर की नजर प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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